अब भारत से कैलाश पर्वत के दर्शन: लिपुलेख व्यू पॉइंट (उत्तराखंड)
अब तिब्बत गए बिना भारत से ही कैलाश पर्वत के दर्शन संभव — उत्तराखंड के ओल्ड लिपुलेख व्यू पॉइंट से। जानिए यह कहाँ है, कैसे पहुँचें, परमिट और पूरी जानकारी।
करोड़ों भक्तों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है — अब तिब्बत गए बिना, भारत की भूमि पर खड़े होकर ही भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत के दर्शन संभव हैं। उत्तराखंड के ओल्ड लिपुलेख दर्रे से यह ऐतिहासिक दर्शन 2024 में पहली बार खुला।
एक नज़र में
कहाँ: ओल्ड लिपुलेख दर्रा, पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), व्यास घाटी — भारत-चीन सीमा के पास
ऊँचाई: लगभग 5,300+ मीटर
कब: मौसम अनुकूल होने पर, आमतौर पर सितंबर के आसपास
अनुमति: सीमावर्ती क्षेत्र — प्रशासन/सेना की अनुमति व पंजीकरण अनिवार्य
यह इतना खास क्यों है?
अब तक कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा करनी पड़ती थी — चीन का वीज़ा, तिब्बत में प्रवेश, और लगभग दो लाख रुपये से अधिक का खर्च। अब लिपुलेख व्यू पॉइंट से वही पवित्र शिखर भारतीय सीमा के भीतर से ही दिखाई देता है। यह उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए वरदान है जो विदेश-यात्रा नहीं कर सकते थे।
कैसे पहुँचें?
सामान्य मार्ग इस प्रकार है:
- पिथौरागढ़ / धारचूला तक सड़क मार्ग से पहुँचें (कुमाऊँ, उत्तराखंड)।
- आगे गुंजी — व्यास घाटी का प्रमुख पड़ाव।
- फिर नाभीढांग — जहाँ से पास ही ॐ पर्वत के भी दर्शन होते हैं।
- अंत में ओल्ड लिपुलेख व्यू पॉइंट — जहाँ से कैलाश के दर्शन होते हैं।
सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा सड़क अब लिपुलेख के निकट तक बन चुकी है, जिससे यह यात्रा पहले से सुगम हुई है — फिर भी अंतिम चरण अत्यधिक ऊँचाई और दुर्गम मौसम वाला है।
अदि कैलाश व ॐ पर्वत भी साथ
इसी क्षेत्र में दो और पवित्र स्थल हैं जिन्हें श्रद्धालु प्रायः एक ही यात्रा में जोड़ लेते हैं:
- अदि कैलाश (छोटा कैलाश): कैलाश जैसा ही दिव्य शिखर, उत्तराखंड में।
- ॐ पर्वत: जिस पर बर्फ स्वाभाविक रूप से "ॐ" की आकृति बनाती है।
यात्रा से पहले — ज़रूरी
यह उच्च-हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र है। दर्शन के दिन, परमिट प्रक्रिया, पंजीकरण और टूर की उपलब्धता हर वर्ष व मौसम के अनुसार बदलती है। यात्रा की योजना से पहले उत्तराखंड पर्यटन, KMVN और पिथौरागढ़ ज़िला प्रशासन के आधिकारिक स्रोतों से नवीनतम जानकारी अवश्य लें। ऊँचाई के कारण acclimatization (अनुकूलन), गर्म कपड़े और स्वास्थ्य-जाँच आवश्यक हैं — हृदय, दमा या रक्तचाप के रोगी चिकित्सक से सलाह लें।
दर्शन के समय एक भाव
जब वह श्वेत शिखर सामने प्रकट हो, तो केवल तस्वीर मत लीजिए — एक क्षण आँखें बंद कर, शिव को मन में बसा लीजिए।
ॐ नमः शिवाय
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भारत की भूमि से कैलाश के दर्शन — आस्था और सौभाग्य का दुर्लभ संगम। हर हर महादेव। 🙏
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अब भारत से कैलाश पर्वत के दर्शन हो सकते हैं?
हाँ। 2024 में पहली बार उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में स्थित ओल्ड लिपुलेख दर्रे से भारतीय भूमि पर खड़े होकर तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत के दर्शन संभव हुए — बिना चीन का वीज़ा लिए। यह व्यू पॉइंट मौसम अनुकूल होने पर (आमतौर पर सितंबर के आसपास) श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है।
लिपुलेख व्यू पॉइंट कहाँ स्थित है?
यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले की व्यास घाटी में, भारत-चीन (तिब्बत) सीमा के पास, लगभग 5,300 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर है।
लिपुलेख व्यू पॉइंट कैसे पहुँचें?
सामान्य मार्ग है — पिथौरागढ़/धारचूला पहुँचकर, आगे गुंजी और नाभीढांग होते हुए ओल्ड लिपुलेख तक। सड़क अब लिपुलेख के निकट तक बन चुकी है, फिर भी अंतिम चरण ऊँचाई व दुर्गम इलाके वाला है।
क्या दर्शन के लिए परमिट चाहिए?
हाँ। यह अत्यंत संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, इसलिए यहाँ जाने के लिए प्रशासन/सेना (ITBP) की अनुमति और पंजीकरण आवश्यक है। यात्राएँ प्रायः कुमाऊँ मंडल विकास निगम (KMVN) या अधिकृत आयोजकों के माध्यम से होती हैं।
कैलाश, अदि कैलाश और ॐ पर्वत में क्या अंतर है?
कैलाश पर्वत तिब्बत में है (लिपुलेख से इसके दर्शन होते हैं)। अदि कैलाश (छोटा कैलाश) और ॐ पर्वत इसी उत्तराखंड क्षेत्र में स्थित अलग तीर्थ हैं, जिन्हें कई श्रद्धालु एक ही यात्रा में जोड़ लेते हैं।
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