कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि, व्रत विधि और श्रीकृष्ण के 5 श्लोक
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है — तिथि, व्रत व पूजा विधि, महत्व और श्रीकृष्ण के 5 प्रेरक श्लोक अर्थ सहित। सरल हिंदी में।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व — कृष्ण जन्माष्टमी — भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। 2026 में यह शुक्रवार, 4 सितंबर को है।
तिथि
अष्टमी तिथि और पूजा का निशिता-काल मुहूर्त क्षेत्र व पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है — कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
महत्व
जन्माष्टमी अधर्म पर धर्म की, अंधकार पर प्रकाश की विजय का स्मरण है। मथुरा में मध्यरात्रि को जन्मे श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से संसार को कर्म, भक्ति और धर्म का अमर संदेश दिया।
व्रत व पूजा विधि
- दिनभर उपवास रखें (फलाहार कर सकते हैं); मध्यरात्रि को जन्म के बाद पारण करें।
- घर में झूला सजाकर बाल-गोपाल की मूर्ति स्थापित करें।
- पंचामृत, माखन-मिश्री और तुलसी अर्पित करें।
- मध्यरात्रि (निशिता काल) में जन्म-आरती, भजन-कीर्तन करें।
श्रीकृष्ण के 5 श्लोक
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के नाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में जन्म लेता हूँ।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
गीता · 2.47तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं।
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
गीता · 18.65अपना मन मुझमें लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो और मुझे नमन करो।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
गीता · 18.66सब कुछ छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ — मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा।
आज का भाव
जन्माष्टमी पर केवल व्रत ही नहीं, श्रीकृष्ण के एक उपदेश को जीवन में उतारने का संकल्प भी लें — यही सच्ची भक्ति है।
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