त्योहार · व्रत

नाग पंचमी 2026: कब है, पूजा विधि, मुहूर्त व कथा

नाग पंचमी 2026 कब है — 17 अगस्त, सोमवार। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, बारह प्रमुख नागों के नाम, महाभारत की कथा और दूध चढ़ाने की सही परंपरा — सरल हिंदी में।

संस्कृत कला29 जुलाई 20264 मिनट
त्योहार · व्रतअनन्तं वासुकिं शेषं❀ संस्कृत कला
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सावन के महीने में नागों की पूजा का पर्व — नाग पंचमी। यह श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है, और 2026 में यह सोमवार, 17 अगस्त को है। संयोग सुंदर है — इस बार यह सावन सोमवार के दिन ही पड़ रही है, जो शिव-आराधना का दिन है।

तिथि व मुहूर्त

नाग पंचमी 2026: सोमवार, 17 अगस्त · श्रावण शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त: लगभग प्रातः 6:04 – 8:39 बजे (नई दिल्ली)
⚠️ 16 या 17 अगस्त? पंचमी तिथि 16 अगस्त को आरंभ हो जाती है, परंतु पूजा उदयकालीन पंचमी वाले दिन यानी 17 अगस्त को होती है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

महत्व — नाग क्यों पूजनीय हैं?

भारतीय परंपरा में नाग केवल भय का विषय नहीं, श्रद्धा का पात्र हैं। इसके तीन कारण हैं:

  • शिव का आभूषण: भगवान शिव के कंठ में वासुकि नाग विराजते हैं। नाग की पूजा शिव-भक्ति से गहराई से जुड़ी है।
  • विष्णु की शय्या: भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं।
  • खेती के मित्र: नाग खेतों में चूहों को खाकर फसल की रक्षा करते हैं — कृषि-प्रधान समाज में यह कृतज्ञता स्वाभाविक थी।

कथा — आस्तीक ने नागों को बचाया

महाभारत की कथा है कि राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के दंश से हुई। बदला लेने के लिए उनके पुत्र जनमेजय ने सर्प-यज्ञ आरंभ किया, जिसमें आहुति के साथ नाग खिंचकर अग्नि में गिरने लगे।

तब ऋषि आस्तीक — जिनकी माता स्वयं नाग-वंश की थीं — वहाँ पहुँचे। उनके ज्ञान और वाणी से प्रभावित होकर जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और नागों के प्राण बचे। मान्यता है कि वह दिन श्रावण शुक्ल पंचमी ही था — इसीलिए यह दिन नागों की रक्षा और पूजा का पर्व बना।

दूसरी प्रचलित कथा

श्रीकृष्ण द्वारा यमुना में कालिया नाग का दमन भी इस पर्व से जोड़ा जाता है — बुराई पर विजय, परंतु प्राण-दान के साथ। कृष्ण ने कालिया को मारा नहीं, उसे सुधारकर छोड़ दिया।

बारह प्रमुख नाग

#नाग#नाग
1अनंत7धृतराष्ट्र
2वासुकि8तक्षक
3शेष9कालिया
4पद्मनाभ10पुष्पक
5कम्बल11पिंगल
6शंखपाल12शंख

पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. घर के मुख्य द्वार पर या पूजा-स्थान में गोबर या मिट्टी से नाग की आकृति बनाएँ — अथवा नाग देवता का चित्र/प्रतिमा रखें।
  3. उस पर कच्चा दूध, जल, हल्दी, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  4. दूर्वा, फूल और लावा/खीर का भोग लगाएँ।
  5. दीप-धूप जलाकर नाग पंचमी की कथा सुनें।
  6. शिव मंदिर में रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी माना जाता है — विशेषकर इस बार, क्योंकि यह सावन सोमवार है।

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥

नाग स्तुति

भाव: अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय — इन नागों को नमन। मान्यता है कि इनके स्मरण से सर्प-भय दूर होता है।

🐍 एक ज़रूरी निवेदन — जीवित साँप को दूध न पिलाएँ

यह इस पर्व की सबसे बड़ी भ्रांति है, और इसे जानना आवश्यक है:

  • साँप दूध पचा नहीं सकते। वे स्तनपायी नहीं हैं; जबरन दूध पिलाना उनके फेफड़ों व पाचन के लिए हानिकारक और कई बार प्राणघातक होता है।
  • सपेरों के पास दिखने वाले साँप प्रायः भूखे-प्यासे और घायल होते हैं; दूध पिलाने की परंपरा के नाम पर उन्हें कष्ट पहुँचता है।
  • भारत में साँपों को पकड़ना या प्रदर्शित करना कानूनन प्रतिबंधित है।

सही परंपरा यही है

शास्त्र-सम्मत पूजा नाग की प्रतिमा, चित्र या मिट्टी की आकृति की ही है — दूध उसी पर अर्पित कीजिए। नाग देवता की सच्ची पूजा उनकी रक्षा है, कष्ट नहीं। यदि कहीं साँप दिखे तो उसे मारें नहीं — वन विभाग या किसी प्रशिक्षित रेस्क्यूअर को सूचित करें। यही इस पर्व का असली भाव है।

जुड़े हुए लेख

नाग पंचमी हमें सिखाती है कि प्रकृति का हर जीव पूजनीय है। नाग देवता की कृपा बनी रहे। हर हर महादेव। 🙏

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाग पंचमी 2026 में कब है — 16 या 17 अगस्त?

नाग पंचमी 2026 में सोमवार, 17 अगस्त को है। भ्रम इसलिए होता है कि पंचमी तिथि 16 अगस्त को आरंभ हो जाती है, परंतु पूजा उदयकालीन पंचमी वाले दिन — 17 अगस्त को — की जाती है। अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।

नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रातःकाल का मुहूर्त लगभग सुबह 6:04 से 8:39 बजे तक रहता है (नई दिल्ली)। समय सूर्योदय पर निर्भर है, इसलिए शहर के अनुसार बदलता है।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व नाग देवताओं के प्रति कृतज्ञता और रक्षा की प्रार्थना का दिन है। महाभारत के अनुसार इसी दिन ऋषि आस्तीक ने राजा जनमेजय का सर्प-यज्ञ रुकवाकर नागों की रक्षा की थी। नाग भगवान शिव के आभूषण भी हैं और खेती के मित्र भी।

क्या जीवित साँप को दूध पिलाना चाहिए?

नहीं। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि साँप दूध पचा नहीं सकते — दूध पिलाना उनके लिए हानिकारक, कई बार प्राणघातक होता है। भारत में साँपों को पकड़ना या प्रदर्शित करना भी कानूनन प्रतिबंधित है। परंपरा में भी पूजा नाग की प्रतिमा, चित्र या मिट्टी की आकृति की ही होती है — दूध उसी पर अर्पित करें।

बारह प्रमुख नाग कौन-कौन हैं?

अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक, कालिया, पुष्पक, पिंगल और शंख — इन्हें द्वादश नाग कहा जाता है और नाग पंचमी पर इनका स्मरण किया जाता है।

क्या नाग पंचमी पर कालसर्प दोष की पूजा होती है?

हाँ, मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा और रुद्राभिषेक से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है। ऐसी विशेष पूजा किसी जानकार के मार्गदर्शन में ही कराएँ।

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