श्लोक

हनुमान चालीसा का अर्थ — सरल हिंदी में

हनुमान चालीसा की प्रमुख चौपाइयों का सरल अर्थ, पाठ के लाभ और सही विधि। तुलसीदास रचित इस अमर स्तुति को समझकर पढ़ें।

संस्कृत कला29 जून 20262 मिनट
श्लोकश्रीमद्भगवद्गीता❀ संस्कृत कला
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गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा भक्ति की सबसे प्रिय स्तुति है। चालीस चौपाइयों में हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति का गुणगान है। यहाँ इसकी प्रमुख चौपाइयों का सरल अर्थ दिया गया है — ताकि आप इसे समझकर पढ़ सकें।

आरंभिक दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

हनुमान चालीसा

गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ कर, मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाला है।

प्रमुख चौपाइयाँ और अर्थ

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

चौपाई

ज्ञान और गुणों के सागर, तीनों लोकों में प्रकाशमान हनुमान जी की जय हो।

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

चौपाई

आप श्रीराम के दूत, अतुलनीय बल के भंडार, अंजनी के पुत्र और पवनसुत कहलाते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

चौपाई

जहाँ महावीर हनुमान का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच आदि नकारात्मक शक्तियाँ पास नहीं आतीं।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

चौपाई

हनुमान जी का निरंतर स्मरण करने से रोग नष्ट होते हैं और सब पीड़ाएँ दूर हो जाती हैं।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

चौपाई

जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे वे हर संकट से मुक्त कर देते हैं।

पाठ के लाभ और विधि

  • मंगलवार और शनिवार हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं।
  • स्नान कर स्वच्छ मन से, श्रद्धा के साथ पाठ करें — एक या ग्यारह बार।
  • माना जाता है कि नियमित पाठ से भय दूर, मन एकाग्र और आत्मविश्वास मजबूत होता है।

मूल भाव

चालीसा केवल शब्द नहीं — श्रद्धा है। अर्थ समझकर पढ़ा गया पाठ मन को साहस और शांति से भर देता है। जय बजरंगबली।

समापन दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

हनुमान चालीसा

हे पवनपुत्र, संकट हरने वाले, मंगलमय रूप वाले! राम, लक्ष्मण और सीता सहित आप मेरे हृदय में निवास करें।

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