एकादशी व्रत: नियम, लाभ और सभी 24 एकादशियों के नाम
एकादशी व्रत क्या है, इसके नियम, लाभ और पारण विधि। साथ ही वर्ष की सभी 24 एकादशियों के नाम — सरल हिंदी में।
एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जो हर माह दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को — आता है। इसे आत्म-संयम, शुद्धि और भक्ति का व्रत माना जाता है।
एकादशी व्रत के नियम
- दशमी की रात से तामसिक भोजन छोड़ दें।
- एकादशी को चावल व अनाज नहीं खाया जाता; फलाहार किया जाता है।
- दिन भगवान विष्णु के स्मरण, तुलसी-पूजन और भजन में लगाएँ।
- मन, वचन और कर्म में संयम रखें — क्रोध व झूठ से बचें।
लाभ
- शरीर को हल्कापन व पाचन-विश्राम मिलता है (उपवास का सहज लाभ)।
- मन एकाग्र व शांत होता है।
- आत्म-संयम और भक्ति-भाव बढ़ता है।
पारण (व्रत खोलना)
एकादशी का पारण अगले दिन — द्वादशी को — शुभ समय में, तुलसी-जल व सात्विक भोजन से किया जाता है। पारण का समय पंचांग के अनुसार देखें।
वर्ष की 24 एकादशियाँ
| क्रम | एकादशी |
|---|---|
| 1 | उत्पन्ना एकादशी |
| 2 | मोक्षदा एकादशी |
| 3 | सफला एकादशी |
| 4 | पुत्रदा (पौष) एकादशी |
| 5 | षटतिला एकादशी |
| 6 | जया एकादशी |
| 7 | विजया एकादशी |
| 8 | आमलकी एकादशी |
| 9 | पापमोचिनी एकादशी |
| 10 | कामदा एकादशी |
| 11 | वरुथिनी एकादशी |
| 12 | मोहिनी एकादशी |
| 13 | अपरा एकादशी |
| 14 | निर्जला एकादशी |
| 15 | योगिनी एकादशी |
| 16 | देवशयनी एकादशी |
| 17 | कामिका एकादशी |
| 18 | श्रावण पुत्रदा एकादशी |
| 19 | अजा एकादशी |
| 20 | परिवर्तिनी एकादशी |
| 21 | इंदिरा एकादशी |
| 22 | पापांकुशा एकादशी |
| 23 | रमा एकादशी |
| 24 | देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी |
ध्यान दें
प्रत्येक एकादशी की तिथि हर वर्ष बदलती है — व्रत की सही तारीख के लिए स्थानीय पंचांग देखें। स्वास्थ्य-स्थिति में उपवास से पहले चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
एकादशी का मूल भाव है — संयम और भक्ति। श्रद्धा से रखा गया व्रत तन और मन दोनों को शुद्ध करता है। जय श्री हरि।
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