क्रोध को कैसे शांत करें — गीता के अनुसार
गीता क्रोध को पतन का द्वार कहती है। क्रोध कैसे बनता है और उसे कैसे शांत करें — श्रीकृष्ण के वचनों के साथ सरल हिंदी में।
गीता क्रोध को हल्के में नहीं लेती — वह इसे विनाश की ओर ले जाने वाली शृंखला की एक कड़ी बताती है।
क्रोध कैसे जन्म लेता है
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते…
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः॥
किसी चीज़ के बारे में बार-बार सोचने से आसक्ति बनती है, आसक्ति से इच्छा, इच्छा में बाधा से क्रोध, क्रोध से मोह, और मोह से बुद्धि का नाश। यानी क्रोध को रोकना है तो शुरुआत में ही सजग होना पड़ता है।
क्रोध शांत करने के सूत्र
- रुकें: क्रोध के क्षण में कोई निर्णय या शब्द नहीं — पहले एक लंबी साँस।
- मूल देखें: क्रोध के नीचे अक्सर कोई अधूरी इच्छा या डर छिपा होता है।
- समभाव: "योगस्थः कुरु कर्माणि" — संतुलन में रहकर काम करना ही बचाव है।
3 साँस का नियम
क्रोध आते ही प्रतिक्रिया देने से पहले तीन धीमी साँसें लें। यही छोटा-सा अंतराल बुद्धि को लौटा लाता है।
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