भाई दूज 2026: तिथि, तिलक मुहूर्त, कथा और विधि
भाई दूज 2026 कब है — 11 नवंबर 2026 (बुधवार)। तिलक का शुभ मुहूर्त, यम-यमुना की कथा, पूजा विधि और इस पर्व का महत्व — सरल हिंदी में।
दीपावली के पाँच दिवसीय पर्व का समापन होता है भाई दूज से — भाई-बहन के स्नेह का पर्व। 2026 में यह बुधवार, 11 नवंबर को है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।
तिथि व मुहूर्त
भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर 2026 · कार्तिक शुक्ल द्वितीया
तिलक मुहूर्त: लगभग दोपहर 1:10 – 3:20 बजे
मुहूर्त क्षेत्र व पंचांग अनुसार बदल सकता है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
कथा — यम और यमुना
सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना बार-बार भाई को घर बुलाती रहीं, पर व्यस्त यम नहीं आ पाए। अंततः कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज बहन के घर पहुँचे।
यमुना ने प्रेम से उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान माँगने को कहा। यमुना बोलीं — "हर वर्ष इसी दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक कराए, उसे अकाल मृत्यु का भय न रहे।"
यम ने "तथास्तु" कहा — और तभी से यह पर्व यम द्वितीया कहलाया।
विधि
- बहन आसन (चौकी) सजाकर भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठाए।
- भाई के माथे पर तिलक लगाकर अक्षत लगाएँ।
- आरती उतारकर मिठाई खिलाएँ।
- भाई की दीर्घायु व सुख की कामना करें।
- भाई बहन को उपहार और रक्षा का वचन दे।
इस भाई दूज
यदि बहन दूर है तो वीडियो कॉल पर तिलक का भाव निभाएँ, या उसे कुछ भेजें। पर्व की आत्मा दूरी में नहीं — याद रखने में है।
जुड़े हुए लेख
- रक्षाबंधन 2026 — तिथि, मुहूर्त व कथा
- दिवाली 2026 — लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
- गोवर्धन पूजा 2026 — अन्नकूट
- 2026 का पूरा त्योहार कैलेंडर
भाई दूज का सार है — रिश्तों को समय देना। शुभ भाई दूज! 🙏
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज 2026 में कब है?
भाई दूज 2026 में बुधवार, 11 नवंबर को है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है और दिवाली के पाँच दिवसीय पर्व का अंतिम दिन है।
भाई दूज 2026 का तिलक मुहूर्त क्या है?
तिलक का शुभ मुहूर्त लगभग दोपहर 1:10 से 3:20 बजे तक है। मुहूर्त क्षेत्र व पंचांग के अनुसार बदल सकता है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे और यमुना ने उन्हें तिलक कर भोजन कराया था। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई बहन के घर तिलक कराएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसीलिए इसे यम द्वितीया कहते हैं।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
दोनों भाई-बहन के पर्व हैं, पर रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) में बहन भाई को राखी बाँधती है, जबकि भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) में बहन भाई को तिलक कर भोजन कराती है और भाई उसके घर जाता है।
भाई दूज पर क्या विधि होती है?
बहन भाई को आसन पर बैठाकर तिलक, अक्षत व आरती करती है, मिठाई खिलाती है और दीर्घायु की कामना करती है; भाई उसे उपहार व रक्षा का वचन देता है।
इसे भी पढ़ें
करवा चौथ 2026: तिथि, चंद्रोदय समय, सरगी और पूजा विधि
करवा चौथ 2026 कब है — 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)। पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय, सरगी, व्रत विधि, कथा और महत्व — सरल हिंदी में।
धनतेरस 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त, क्या खरीदें और यम दीपम
धनतेरस 2026 कब है — 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)। पूजा का शुभ मुहूर्त, धन्वंतरि पूजा, क्या खरीदना शुभ है, यम दीपम की परंपरा और पूरी विधि — सरल हिंदी में।
गोवर्धन पूजा 2026: तिथि, अन्नकूट, कथा और पूजा विधि
गोवर्धन पूजा 2026 कब है — तिथि, प्रातःकाल मुहूर्त, अन्नकूट की परंपरा, श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा और पूजा विधि — सरल हिंदी में।